मोहब्बत में कुर्बानी की दास्तान
किसी मजनू से मत पूछना
तुम पूछना उस बादल से
जिसने काटी अनगिनत दूरियाँ
सहकर जाने कितनी आँधियाँ
सिर्फ इस एक उम्मीद में
की जब एक दिन मुलाकात होगी
तब कोई बरसात नहीं रुकेगी
वह अपनी मोहब्बत में घुल जाएगा
इस धरती के हर ज़र्रे में बिखरकर
अपना सारा वजूद मिटाकर
Category: hindi
Pull Request
कितनी आसान होती जिंदगी अगर
हर मुश्किल मोड पे कोई आकर
थोड़ा सा इस दिल में झांककर
दे देता बस एक P.R. लिखकर
और मैं बदल जाता तब हसकर
बिना conflict के merge होकर
गम
इन निगाहों को इस नकाब से
रिहा ना कीजिएगा
आपके आंसू इस जमाने से
जाहिर ना कीजिएगा
अगर हर आशिक आपका इस गम को
पीने में लग जाएगा
खत्म हो कर शराब हर मयखाने को
फिर ताला लग जाएगा
अंजान
कलम से कुछ लब्ज़
जुदा ना हो पाएं
दिल से कुछ ख्वाइशें
अलविदा ना हो पाएं
चाहें आप हमसे कभी
मेहरबान ना हो पाएं
इन नज्मों से आप कभी
अंजान ना हो पाएं
कबर
बिक रही हैं ज़िंदगियाँ
पत्थरों के दाम
क्या खोज रहाँ इन्सान
खुद ही से हैं वो बेईमान
तान कर खड़े हैं सीने
बिना किसी खबर
खोद ली हैं हमने
कब से अपनी ही कबर
मौजूदगी
लब्ज़ कही कागज पे
आज उतर ना जाए
जज़्बात कही निगाहों से
जाहिर ना हो जाए
ख्वाइशें कही सीने से
परे ना हो जाए
आपको क्या खबर
आपकी मौजूदगी का असर
मेरी धड़कनों से कही इश्क मेरा
बयान ना हो जाए
तूफान
यादों से सी लेंगे
ज़ख्म तन्हाई के
ढूंढ लेंगे लत कोई
वक़्त की पैमाइश के लिए
मुश्किलें तो तब हैं
जब बरसात आएगी
छोटी सी बूंदे जब
दिल को दस्तक दे जाएगी
जब अपने अंदर का तूफान
खुद ना रोक सका आसमान
आँखों की क्या हैसियत
तेहज़ीब में पेश आएँगी
दोस्ती
कलम में स्याही कुछ
सहमी सी हैं
जुबान पर लब्ज़ों की
कमी सी हैं
चंद साँसे भी आज
रुकी सी हैं
ये आदत तो अब
पुरानी सी हैं
खामोशी से अपनी
दोस्ती सी हैं
मातम
गैरों को पेश कर
आज खूब रोशनाई
तूने घरौंदे की
क्या इज्जत बढ़ाई
बजाओ तालियाँ कही
मातम न दे सुनाई
कुछ चित्ताएं अंदर
अभी भी हैं जल रहीं
“I defy you to show me discrimination” – India’s External Affairs Minister at Washington DC when asked on minority rights.
लत
आपकी गैरमौजूदगी की आदत हो गई
आपके साएं की तलब भी मिट गई
अब याद न दिलाओ दिन जब गुलज़ार थे
अब कांटो से खेलने की लत लग गई