हाथों की कुछ चंद लकीरें
या सड़क किनारे बैठा तोता
आसमान में ही कोई बादल
या आँगन में खेलता वो झोंका
काश कभी तो कोई
इस लौ को भनक देता
देता आने वाले तूफ़ान की
कोई तो छोटी सी इत्तला
Poems by Rohit Malekar
हाथों की कुछ चंद लकीरें
या सड़क किनारे बैठा तोता
आसमान में ही कोई बादल
या आँगन में खेलता वो झोंका
काश कभी तो कोई
इस लौ को भनक देता
देता आने वाले तूफ़ान की
कोई तो छोटी सी इत्तला