कोण्या एका घनदाट जंगलात
मस्त डोलणाऱ्या झाडाच्या
कुशीत राहून वाढलेली
होती ती भिंतीतली खुंटी
कधी पिशवी कधी सतरंजी
कधी पावसात भिजलेली छत्री
न प्रश्न न कुतूहल कधी
धरलं खांद्यावर जे आलं नशिबी
तुझ्यावर डागल्या किती मी तोफा
तुझी कधी ना तक्रार ना कधी अपेक्षा
सोडला तुझ्यावर भार माझा सारा
का नाही सुटला तुझा कधी पारा
असती जवळ एखादी परी
पाहिली असती कधीच तिची भरारी
पण होती आयुष्यात रोवलेली
माझ्याकडे अढळ साथ तुझी
Category: feel
अजनबी
आपकी सदा में कोई ख़ता न थी,
मेरे दर को दस्तक की आदत न थी
तन्हाई इकलौती दौलत है मेरी
गिनते-गिनते जिसे ये उम्र कटी
अपनों से आस सलीक़े से थी छोड़ी
वो सलीक़ा तोड़ा एक नज़र ने तुम्हारी
जिन दीवारों में ज़िंदगी थी छिपी
तुम्हारी मुस्कुराहट से दरारें पड़ गईं
उम्मीद जो तेरी आँखों में है जमी
उससे डर लगता है, ए अजनबी
इत्तला
हाथों की कुछ चंद लकीरें
या सड़क किनारे बैठा तोता
आसमान में ही कोई बादल
या आँगन में खेलता वो झोंका
काश कभी तो कोई
इस लौ को भनक देता
देता आने वाले तूफ़ान की
कोई तो छोटी सी इत्तला
The Check-In Luggage
A scattering of abandoned goals
A sight of expectations unmet
Lying pieces of broken promises
Loud scars of violent words
Heaps of painful memories
Long nights of vanishing hopes
Your eyes betray what you don’t anon
You alone no more can push this cart
You might have a smile as a carry-on
But you are checking in a heavy heart
चपराक
एकदा टपरीवर खरं
अचानक भेटला होता देव
“हवा पाणी हाय का बरं?”
सलगी कराया झाली माझी उठाठेव
तिरस्कार थुंकून डोळ्यातनं मग
दिली जोरात ठेऊन चपराक त्यानं
“का कावलायस आज उग?”
विचारलं मी पुसत त्याची पाचही बोटं
“कारट्या, केवढी सुरेख रे होती
कोरली तुमच्यासाठी सारी सृष्टी
रक्तानं सारवून, धुळीनं माखून
गटारात घातलासा की रे ही पृथ्वी”
“म्या काय एकटा करणार एवढ्या जनात?
म्या कुठं काय बी नाही पेटवली काडी?”
“आग कशी नाही पेटत तुझ्या मनात,
म्हणूनच काढला लेका जाळ कानाखाली”
Feelings के चौकीदार
“इतना smile करोगे तो
कौन लेगा seriously तुम्हें?”,
“थोड़ा मुस्कुराओगे मेहमानों में
तो पैसे नहीं कटेंगे bank से”,
“गुस्सा तुम क्यों हो रहें हो
बात तो सही हैं ना उनकी?”,
“पैसे ले गया जादा तुमसे वो
गुस्सा कैसे नहीं आ रहाँ तुम्हे?”,
“चिल्लाओं मत उनपे तुम,
भगवान का रूप होते हैं बच्चे”,
“इतने नरमी से पेश आओगे,
तो बच्चे हाथ से निकल जाएंगे”,
“Match ही तो हैं कोई जंग नहीं
इतना emotional क्यों हो रहें हो?”,
“ऐसे आराम से कैसे सो सकते हो
किसी का दर्द कभी समझ पाए हो?”
An Ode to the Ones We Become
I am not the same soul
Whom you sought last
I don’t expect you to
Beat the same heart
I hope the weather was
Much kinder for you
Alas! If only I knew
How to skip a storms few
I wish your battles carved
A stronger version of you
Alas! I could say that
My bruises aren’t new
Speak to me of your sorrows
And I will show you my scars
Let us drown in our memories
Under the same old stars
औक़ात
निकले थे घर से कभी
दुनिया बदलने हम भी
ना जाने कब हुई पराई
हम से ही हमारी परछाई
आईने में देता है दिखाई
रोज़ नया अजनबी कोई
पूछता रहता है एक पता
है नाम बड़ा जाना-पहचाना
ऐसा नहीं है हरगिज़
कि हार मान चुके हैं हम
तू दिखा दे खुदा तेरा दम
बंदा पी लेगा एक और ग़म
फिर आँसुओं की कहीं
आज बरसात होगी
ज़िंदगी हमको हमारी
औक़ात दिखा देगी
शुक्र है
शुक्र है कि सिर्फ़ चाहने से
दोबारा जी पाता हूँ उन यादों में,
वरना ना जाने कितनी तस्वीरों में
उलझा देता ये आवारा दिल।
शुक्र है कि सिर्फ़ चाहने से
नहीं बनती किसी की क़िस्मत,
वरना ना जाने कितनी तक़दीरों में
उलझा देता ये आवारा दिल।
महत्त्वाकांक्षा
असंच एकदा कधीतरी
भर उन्हात दुपारी
रिकाम्याश्या रस्त्यालगत
बंद दुकानाच्या फळीवर
हाताची उशी करून
पाय जरा मोकळं पसरून
तास दोन तास तरी
मस्त ताणून देण्याची
महत्त्वाकांक्षा उरात
बाळगून आहे जोरात