The Check-In Luggage

A scattering of abandoned goals
A sight of expectations unmet
Lying pieces of broken promises
Loud scars of violent words
Heaps of painful memories
Long nights of vanishing hopes
Your eyes betray what you don’t anon
You alone no more can push this cart
You might have a smile as a carry-on
But you are checking in a heavy heart

चपराक

एकदा टपरीवर खरं
अचानक भेटला होता देव
“हवा पाणी हाय का बरं?”
सलगी कराया झाली माझी उठाठेव

तिरस्कार थुंकून डोळ्यातनं मग
दिली जोरात ठेऊन चपराक त्यानं
“का कावलायस आज उग?”
विचारलं मी पुसत त्याची पाचही बोटं

“कारट्या, केवढी सुरेख रे होती
कोरली तुमच्यासाठी सारी सृष्टी
रक्तानं सारवून, धुळीनं माखून
गटारात घातलासा की रे ही पृथ्वी”

“म्या काय एकटा करणार एवढ्या जनात?
म्या कुठं काय बी नाही पेटवली काडी?”
“आग कशी नाही पेटत तुझ्या मनात,
म्हणूनच काढला लेका जाळ कानाखाली”

Feelings के चौकीदार

“इतना smile करोगे तो
कौन लेगा seriously तुम्हें?”,
“थोड़ा मुस्कुराओगे मेहमानों में
तो पैसे नहीं कटेंगे bank से”,
“गुस्सा तुम क्यों हो रहें हो
बात तो सही हैं ना उनकी?”,
“पैसे ले गया जादा तुमसे वो
गुस्सा कैसे नहीं आ रहाँ तुम्हे?”,
“चिल्लाओं मत उनपे तुम,
भगवान का रूप होते हैं बच्चे”,
“इतने नरमी से पेश आओगे,
तो बच्चे हाथ से निकल जाएंगे”,
“Match ही तो हैं कोई जंग नहीं
इतना emotional क्यों हो रहें हो?”,
“ऐसे आराम से कैसे सो सकते हो
किसी का दर्द कभी समझ पाए हो?”

An Ode to the Ones We Become

I am not the same soul
Whom you sought last
I don’t expect you to
Beat the same heart

I hope the weather was
Much kinder for you
Alas! If only I knew 
How to skip a storms few

I wish your battles carved
A stronger version of you
Alas! I could say that
My bruises aren’t new

Speak to me of your sorrows
And I will show you my scars
Let us drown in our memories
Under the same old stars

औक़ात

निकले थे घर से कभी
दुनिया बदलने हम भी
ना जाने कब हुई पराई
हम से ही हमारी परछाई

आईने में देता है दिखाई
रोज़ नया अजनबी कोई
पूछता रहता है एक पता
है नाम बड़ा जाना-पहचाना

ऐसा नहीं है हरगिज़
कि हार मान चुके हैं हम
तू दिखा दे खुदा तेरा दम
बंदा पी लेगा एक और ग़म

फिर आँसुओं की कहीं 
आज बरसात होगी
ज़िंदगी हमको हमारी
औक़ात दिखा देगी

शुक्र है

शुक्र है कि सिर्फ़ चाहने से
दोबारा जी पाता हूँ उन यादों में,
वरना ना जाने कितनी तस्वीरों में
उलझा देता ये आवारा दिल।


शुक्र है कि सिर्फ़ चाहने से
नहीं बनती किसी की क़िस्मत,
वरना ना जाने कितनी तक़दीरों में
उलझा देता ये आवारा दिल।

महत्त्वाकांक्षा

असंच एकदा कधीतरी

भर उन्हात दुपारी

रिकाम्याश्या रस्त्यालगत

बंद दुकानाच्या फळीवर

हाताची उशी करून

पाय जरा मोकळं पसरून

तास दोन तास तरी

मस्त ताणून देण्याची

महत्त्वाकांक्षा उरात

बाळगून आहे जोरात

कोहरा

ये कोहरा तो पिघल जाएगा,
आफताब की आहट से,
कमबख्त के साथ लिखे,
जो रातभर हमने शिकवे,
दर्द कुछ स्याही में लिपटे,
क्या होंगे कभी वो भी फीके?

राजगडाची रात्र

किती डोळ्यात वाट
आता झाली पहाट
आला पहिला प्रहर
देवा, का हा कहर?

तो औरंग्या शापित
त्याचा मुठीत काबीज
झाला अर्धा मुलुख
काय करल तो सुलुख?

रोवलंय माझ्या लेकरानं
स्वराज्यचं अनमोल बीज
तोवर नाही त्याला निज
त्याची तुला काय चीज?

नको चांदणं अंगणात
माझ्या छाव्यास ते दाव
त्याचं पाऊल जंगलात
तोवर तू पाण्यात

Jijamata endured a long and harrowing silence, with weeks of rumours whispering Shivaji’s recapture or worse, his death, as he travelled in disguise through hostile Mughal territory after his daring escape from Agra. This is an attempt to pen a sleepless night for a deeply devout parent who had already endured the loss of one son.

खामोशी

अनकहे अल्फाजों की भीड़ में
खिल रहीं ख्वाहिशें
समेटकर मानो पूरी जिंदगी
यूंही एक पल में


इन सांसों की मौजूदगी होगी
तब्दील जब यादों में
कोशिश करेंगे ना होगा गम कोई
आपकी कशिश में


करके मगर तकाजा इजहार का
इस मुलाकात की
ना छीन लो मिल्कियत इकलौती
हमसे हमारी खामोशी