Distance

Like the light luring the mist to flee
You dissolve all my worries to be
Like how a flower is found by a busy bee
I search and seek for you within me
But let me not surrender my heart
To the want of us not being apart
The two shores walking along forever
If they met, what would be of the river?
If the moon got what it always craves
Would there be any more waves?
The sky hops horizons in the hopes to hug
The Earth wanders and waits without a shrug
So let me not squander any resistance
There is meaning to find in this distance.

हकीक़त

मेरे धड़कनों की दस्तकों से
गूँजी थी तेरी इजाजत
सपनों में हो शामिल तेरे
जिंदगी हो गयी थी नुमायत

अब तो बस यही हैं
उस जिंदगी से ये शिकायत
फीके हुए ख्वाबों जैसी
हो गयी हैं हमारी हकीक़त

गांठ

एक पतंग की डोर सी
थी सीधी साधी जिंदगी
आकर पवन के झांसे में
कुछ गुमराह सी हो गई
जोश में उड़ान जो भरी
कुछ गांठे ये सख्त हो गई

अकेलापन

रोक ना सका कोई
इन आँसूओ का सावन
ना दिखाओ ख्वाब जो
होंगे ना पूरे किसी आंगन
काफी ना होगी चाहत तुम्हारी
जो तोड़े इन बेड़ियों का बंधन
माँग के दिल मेरा मुझसे
ना छीनो मेरा अकेलापन

Oblivion

Isn’t there a certain
joy in oblivion?

When I can laugh my heart out
And cherish the show from the crowd
When you there on the stage
Can neither express agony nor rage?

You parrot a script you didn’t write
For a character that ain’t suit you right
And what happens to those labels all
When the curtain commits that certain fall?

When I walk with my joys few
Can you really find you?

दस्तक

कुछ दोस्तों ने मिलके
दुश्मनों को दस्तखत दे दी
कुछ अपनों ने ही अपनी
सारी मिट्टी निलाम कर दी
कल शायद सूरज भी
सेहर में सहम जाएगा
कोई एक अजनबी जब
बंदूक से दस्तक देगा

On Afghanistan, August, 2021

अजनबी

समशान घाट की चीखों से दूर
सर पे हाथ रखे था कोई बैठा
“जानपहचान का था या था कोई सगा?”
कर हिम्मत मैंने उसे पूछा
“ना कोई मेरा सगा ना कोई पराया,
पर इंसान, आज तो मैं भी थक गया”
कहकर यमराज अकेले ही रो दिया

#covid19

थोड़ा जी लेने दे

आज तूफान को हँस लेने दे
अंधेरे को तू छा जाने दे
थोड़ा खून बह लेने दे
दिल पे घाव लग जाने दे

थोड़ा बोझ समंदर को भी लेने दे
इस कश्ती को डूब जाने दे
बादल को थोड़ा पिघल लेने दे
बरसात से आंसू धूल जाने दे

आंधी को भी थक जाने दे
धड़कन दिल की सुन लेने दे
तक़दीर को भी जरा हैरान होने दे
अपने आप को थोड़ा मुस्करा लेने दे

Let My Country Awake, May Be

Where thoughts are censored and rumors roar loud;
Where the facts are manufactured;
Where the world has been broken up into communities by caste and creed;
Where every dissent is seen as contempt;
Where we elect those who have the least respect for the law;
Where selfish interests fuel the fire to burn all sense and reason;
Where one needs to prove their patriotism by pleasing those in power –
Into that swamp, my Gurudev, our country lays in slumber.

Inspired by “Let My Country Awake” by Rabindranath Tagore