कबर

बिक रही हैं ज़िंदगियाँ
पत्थरों के दाम
क्या खोज रहाँ इन्सान
खुद ही से हैं वो बेईमान

तान कर खड़े हैं सीने
बिना किसी खबर
खोद ली हैं हमने
कब से अपनी ही कबर

मौजूदगी

लब्ज़ कही कागज पे
आज उतर ना जाए

जज़्बात कही निगाहों से
जाहिर ना हो जाए

ख्वाइशें कही सीने से
परे ना हो जाए

आपको क्या खबर
आपकी मौजूदगी का असर

मेरी धड़कनों से कही इश्क मेरा
बयान ना हो जाए

तूफान

यादों से सी लेंगे
ज़ख्म तन्हाई के
ढूंढ लेंगे लत कोई
वक़्त की पैमाइश के लिए

मुश्किलें तो तब हैं
जब बरसात आएगी
छोटी सी बूंदे जब
दिल को दस्तक दे जाएगी

जब अपने अंदर का तूफान
खुद ना रोक सका आसमान
आँखों की क्या हैसियत
तेहज़ीब में पेश आएँगी

दोस्ती

कलम में स्याही कुछ
सहमी सी हैं
जुबान पर लब्ज़ों की 
कमी सी हैं
चंद साँसे भी आज
रुकी सी हैं
ये आदत तो अब 
पुरानी सी हैं
खामोशी से अपनी  
दोस्ती सी हैं

मातम

गैरों को पेश कर
आज खूब रोशनाई
तूने घरौंदे की
क्या इज्जत बढ़ाई
बजाओ तालियाँ कही
मातम न दे सुनाई
कुछ चित्ताएं अंदर
अभी भी हैं जल रहीं

“I defy you to show me discrimination” – India’s External Affairs Minister at Washington DC when asked on minority rights.

लत

आपकी गैरमौजूदगी की आदत हो गई
आपके साएं की तलब भी मिट गई
अब याद न दिलाओ दिन जब गुलज़ार थे
अब कांटो से खेलने की लत लग गई

बरसात

The last stanza is an ode to the original song from the 2001 movie Yaadien

कुछ रोज पहले ऐसी
बरसात हुई थी
मुद्दतो बाद याद तेरी
आई हुई थी

कुछ सांसे सहमी सी
बोझल हुई थी
घडी भी शायद थोड़ी
रुकी हुई थी

जिंदगी एक किताब सी 
बनी हुई थी
जहाँ एक अधूरी कहानी
छिपी हुई थी

तू पहचान जिसमे मेरी
बन ना पाई थी
कुछ खामोश ख्वाइशें भी
वहाँ खोई हुई थी

“कुछ साल पहले दोस्तों
एक बात हुई थी
हमको भी मोहब्बत 
किसी के साथ हुई थी”

तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे

This is an attempted extension to the original song

अपना बना ले पिया
अपना बना ले पिया
सुनी इस डगर पे
हाथ तू थाम ले पिया

अकेली हैं ये रातें हाँ रातें हाँ रातें
बदली हैं जाने कितनी करवटे 
बैचिनी सताए जब तेरी ही बातें 
करते हैं सपने सारे

आसमान में भी नही कोई सितारा तेरे जैसा
तेरी काया को खुदा भी दोहरा ना पाया
मेरी किस्मत पे मैं खुद ही शक करु 

आके मुझे मेरी तनहाई से छुड़ा ले
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे

हिफाजत

जमीन से निकली हैं चीखें
कब तक गूंगे बनें रहोगे?
अतीत को अनदेखा कर
क्या भविष्य बनाओगे?

क्या विधान पढ़ोगे?
क्या कानून लिखोगे?
नए इस दरबार में जाने
किसकी हिफाजत करोगे?

#WrestlersProtests #ParliamentNewBuilding

वफ़ा

खयालों में कुछ नमी सी हैं
नींद भी कुछ खफा सी हैं
दिल में सुकून की कमी सी हैं
आज रात वफ़ा बैचैनी से हैं