तू कहां
चल दी
ए जिंदगी
अंजान राहें
तन्हा ये बाहें
रूसवे जो इतने
जुदा हम हमसे
टूटे सपने
गमगीन आंखे
आंगन में बिखरे
ख्वाइशों के अंगारे
ढूंढे पल हलके
ये बोझल पलके
दिलसे पर बरसे
बेजुबान चीखें
तू कहां
चल दी
ए जिंदगी
Poems by Rohit Malekar
तू कहां
चल दी
ए जिंदगी
अंजान राहें
तन्हा ये बाहें
रूसवे जो इतने
जुदा हम हमसे
टूटे सपने
गमगीन आंखे
आंगन में बिखरे
ख्वाइशों के अंगारे
ढूंढे पल हलके
ये बोझल पलके
दिलसे पर बरसे
बेजुबान चीखें
तू कहां
चल दी
ए जिंदगी
सुकून का एक पल
चुरा लेने दो
इस मंजर की एक याद
छुपा लेने दो
मौसम से थोड़ा सा इत्मीनान
छीन लेने दो
आज एक दूसरे की कुछ सांसे
सुन लेने दो
एक ख्वाब
कुछ जुर्म सा हैं
आज बेनकाब
कुछ दिल सा हैं
ये बेताब
कुछ लम्हे कह गए
वो शादाब
तेरी मौजूदगी में हो गए
सब बेअदब
मेरे इस इकबाल में हैं
अब सबब
अल्फाजों से परे हैं
एक हिसाब
टूटे उसूल माँग रहें
तेरे सोहबत
की कीमत ढूंढ रहें
जाने रब
तुझे महसूस करने की सजा
झेलेंगे अब
किसी अफसोस के बिना
भरे हुए कैलेंडर के किसी
खतम हुए झूम कॉल पर
अकेले रूके अटेंडी की तरह
जिंदगी ताक रही हैं
सुनसान प्लेटफॉर्म पर
छूटी हुई ट्रेन की वजह
ख्वाब सी लगती हैं अब
जिंदगी देखती थी ख्वाब जब
साँसे भी सेहमी सी हैं अब
क्या पता आ जाये तूफान कब
पलके खुली रहेंगी रातभर अब
बंद मुठी में उमीदें सब
“जिंदगी सुन, तू यही पे रुकना
हम हालात बदल कर आते हैं”
उधार में थोड़ी सी हिम्मत लेकर
अपने वजूद को उम्मीद दे आते हैं
इस तूफ़ान को थाम लो थोड़ा जरा
एक कश्ती को भवंडर से ले आतें हैं
इन पलों को हिरासत में रखना
कुछ ग़मों को आजाद कर आते हैं
खोई हुई धड़कनों की गूँज में
अपने आप को ढूँढ ले आते हैं
जिंदगी सुन, अपनी तक़दीर को
हम थोड़ा हैरान कर आते हैं
बरसो पहले आयी थी
ऐसी ही एक दीवाली
जिंदगी रोशन नही थी उतनी
हुई मुस्कान से तेरी जितनी
इसलिए आज रो रहे हैं
बनकर हम फरियादी
त्यौहार कैसे बताओ मनाये
तेरे बिना सजा हैं ये रोशनाई
कैसी अंजान बीमारी में फँसकर
हार गयी फूटी तक़दीर
अब यादों का झोला फैलाकर
हम बन गए एक फकीर
घूम रहें हैं कंधोंपर लेकर आज भी
बच्चे तुझसे बिछड़ने का बोझ
लंबी चलेगी अबसे दिवाली क्यों कि
एक साल सा लगता हैं हर रोज
ये दिल इतनी हड़बड़ी में क्यों हैं
कही वापिस से धड़कने की इसे
कोई उम्मीद तो नही हैं
इस सपनों के समशान में
कोई मिल जाये तो समझादे उसे
ये घाँव आँखरी थोड़ी ही हैं
आँखों में आँसू अभी से हैं
स्याही ने भी शिकवा लिखवा लिए
दिल भी अपना थोड़ा फरियादी हैं
आज जाने की इतनी जिद्द क्यों हैं
हम ना बन सके हमसफर तो क्या
साथ रख लो छोटा सा ये नजराना
दिल के साथ चुरा ले जाओ थोड़ी सी
हमसे कुछ शिकायतें हमारी
In a world that doesn’t
Look at all like this
Where the choices
From our past
Haven’t shackled us
To these paths
Daring to have built
A craving for thee
I would ask for you
To set myself free
From carrying the guilt
For wanting you for me
So I could muster
All the courage
To do what I should
And say this to thee
I wish you could
Come dance with me