घाँव

ये दिल इतनी हड़बड़ी में क्यों हैं
कही वापिस से धड़कने की इसे
कोई उम्मीद तो नही हैं
इस सपनों के समशान में
कोई मिल जाये तो समझादे उसे
ये घाँव आँखरी थोड़ी ही हैं

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