आपकी गैरमौजूदगी की आदत हो गई
आपके साएं की तलब भी मिट गई
अब याद न दिलाओ दिन जब गुलज़ार थे
अब कांटो से खेलने की लत लग गई
Author: Rohit Malekar
बरसात
The last stanza is an ode to the original song from the 2001 movie Yaadien
कुछ रोज पहले ऐसी
बरसात हुई थी
मुद्दतो बाद याद तेरी
आई हुई थी
कुछ सांसे सहमी सी
बोझल हुई थी
घडी भी शायद थोड़ी
रुकी हुई थी
जिंदगी एक किताब सी
बनी हुई थी
जहाँ एक अधूरी कहानी
छिपी हुई थी
तू पहचान जिसमे मेरी
बन ना पाई थी
कुछ खामोश ख्वाइशें भी
वहाँ खोई हुई थी
“कुछ साल पहले दोस्तों
एक बात हुई थी
हमको भी मोहब्बत
किसी के साथ हुई थी”
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
This is an attempted extension to the original song
अपना बना ले पिया
अपना बना ले पिया
सुनी इस डगर पे
हाथ तू थाम ले पिया
अकेली हैं ये रातें हाँ रातें हाँ रातें
बदली हैं जाने कितनी करवटे
बैचिनी सताए जब तेरी ही बातें
करते हैं सपने सारे
आसमान में भी नही कोई सितारा तेरे जैसा
तेरी काया को खुदा भी दोहरा ना पाया
मेरी किस्मत पे मैं खुद ही शक करु
आके मुझे मेरी तनहाई से छुड़ा ले
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
हिफाजत
जमीन से निकली हैं चीखें
कब तक गूंगे बनें रहोगे?
अतीत को अनदेखा कर
क्या भविष्य बनाओगे?
क्या विधान पढ़ोगे?
क्या कानून लिखोगे?
नए इस दरबार में जाने
किसकी हिफाजत करोगे?
#WrestlersProtests #ParliamentNewBuilding
Starve
I do not know
How to
Get used to
Being without you
I do not know
Where do
I move to
Search for you
I do not know
When shall
The morning befall
When I find you
I do not know
Why do
I let my heart
Starve for you
Wake Up
Wake up
‘Coz while you have been living
you have not been feeling,
you have been existing
With so little sensing
Wake up
Not to the sounds that you hear
but to the sobs that you don’t
to who you really are
to what you bear
Wake up
‘Coz what gains are any good for
Showing yourself to the world
When those close struggle
to see you unfurled.
Wake up. Breathe. Feel. Love.
वफ़ा
खयालों में कुछ नमी सी हैं
नींद भी कुछ खफा सी हैं
दिल में सुकून की कमी सी हैं
आज रात वफ़ा बैचैनी से हैं
कत्ल
नाचीज़ की इस एक
दिक्कत को सुलझाईएगा
झुकी हुई पलकों में
दिल को ना कैद कीजिएगा
कैसे माँगू रिहाई मगर
उठी पलकों से कत्ल जो हो जायेगा
बेइख्तियार
कुछ अधूरे नगमो को कैसे
तुम्हारे नाजो अंदाज से भर दूं
तुम्हारे सोहबत में मैं कैसे
मसरूर बन कर रह जाऊ
खोए हुए कदमों को कैसे
अनदेखी राहों पर ले जाऊ
बीतें कुछ लम्हों को कैसे
तुम्हारी आरजूओं से भर दूं
इस वक्त को मैं कैसे
बेइख्तियार कर दूं
जिंदगी की कुछ सुर्खियां कैसे
तुम्हारे साथ फिर से जी लूं
Figureless
It isn’t made in stone
but it ain’t fragile
It resides in every bone
but it ain’t sterile
It dissolves my duality
Of desires and sacrifice
I carve myself a reality
Worthy of my own choice
It needs no nectar nor necklace
‘Coz power needs no drape
My faith is figureless
‘Coz belief needs no shape