With muddled memories
And biased thoughts
From tilted perspectives
And choices flawed
We spend a lifetime
Blinded with distortions
But blame the machine
Trained on our ways
Of erring in decisions
Calling it hallucinations!
Author: Rohit Malekar
Dare
When you cast a bullet
Can you also emboss on it
With certainty the faith
You wish to desecrate?
At the soil drenched in blood
Can you stare long enough
To quote the side from where
Came the dreams that bled?
When you hear cries of a mate
Can you dare find the words
To solace the broken soul
Devoid of revenge and hate?
दोस्ती
कलम में स्याही कुछ
सहमी सी हैं
जुबान पर लब्ज़ों की
कमी सी हैं
चंद साँसे भी आज
रुकी सी हैं
ये आदत तो अब
पुरानी सी हैं
खामोशी से अपनी
दोस्ती सी हैं
मातम
गैरों को पेश कर
आज खूब रोशनाई
तूने घरौंदे की
क्या इज्जत बढ़ाई
बजाओ तालियाँ कही
मातम न दे सुनाई
कुछ चित्ताएं अंदर
अभी भी हैं जल रहीं
“I defy you to show me discrimination” – India’s External Affairs Minister at Washington DC when asked on minority rights.
भुरळ
धुक्यामध्ये धुकं हरवलं
माझं मन तुझ्यात गुंतलं
आरश्यात कोण उभं
माझं मलाच झालं परकं
खळी तुझ्या गालावर
मग माझी का सावरा सावर?
डोळ्यात तुझ्या काजळ
हृदयात माझ्या का वावटळ?
तुझ्या वेणीतलं फुल
त्याच्याशी ही माझी जळजळ
तुझ्या पायातलं पैंजण
तुझी आणखी एक आठवण
कसा होणार सांभाळ?
कधी होणार तुझ्याशी मेळ?
किती करशील माझा छळ?
उतरेल का कधी तुझी भुरळ?
लत
आपकी गैरमौजूदगी की आदत हो गई
आपके साएं की तलब भी मिट गई
अब याद न दिलाओ दिन जब गुलज़ार थे
अब कांटो से खेलने की लत लग गई
बरसात
The last stanza is an ode to the original song from the 2001 movie Yaadien
कुछ रोज पहले ऐसी
बरसात हुई थी
मुद्दतो बाद याद तेरी
आई हुई थी
कुछ सांसे सहमी सी
बोझल हुई थी
घडी भी शायद थोड़ी
रुकी हुई थी
जिंदगी एक किताब सी
बनी हुई थी
जहाँ एक अधूरी कहानी
छिपी हुई थी
तू पहचान जिसमे मेरी
बन ना पाई थी
कुछ खामोश ख्वाइशें भी
वहाँ खोई हुई थी
“कुछ साल पहले दोस्तों
एक बात हुई थी
हमको भी मोहब्बत
किसी के साथ हुई थी”
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
This is an attempted extension to the original song
अपना बना ले पिया
अपना बना ले पिया
सुनी इस डगर पे
हाथ तू थाम ले पिया
अकेली हैं ये रातें हाँ रातें हाँ रातें
बदली हैं जाने कितनी करवटे
बैचिनी सताए जब तेरी ही बातें
करते हैं सपने सारे
आसमान में भी नही कोई सितारा तेरे जैसा
तेरी काया को खुदा भी दोहरा ना पाया
मेरी किस्मत पे मैं खुद ही शक करु
आके मुझे मेरी तनहाई से छुड़ा ले
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
हिफाजत
जमीन से निकली हैं चीखें
कब तक गूंगे बनें रहोगे?
अतीत को अनदेखा कर
क्या भविष्य बनाओगे?
क्या विधान पढ़ोगे?
क्या कानून लिखोगे?
नए इस दरबार में जाने
किसकी हिफाजत करोगे?
#WrestlersProtests #ParliamentNewBuilding
Starve
I do not know
How to
Get used to
Being without you
I do not know
Where do
I move to
Search for you
I do not know
When shall
The morning befall
When I find you
I do not know
Why do
I let my heart
Starve for you