तूफान

यादों से सी लेंगे
ज़ख्म तन्हाई के
ढूंढ लेंगे लत कोई
वक़्त की पैमाइश के लिए

मुश्किलें तो तब हैं
जब बरसात आएगी
छोटी सी बूंदे जब
दिल को दस्तक दे जाएगी

जब अपने अंदर का तूफान
खुद ना रोक सका आसमान
आँखों की क्या हैसियत
तेहज़ीब में पेश आएँगी

Dare

When you cast a bullet
Can you also emboss on it
With certainty the faith
You wish to desecrate?

At the soil drenched in blood
Can you stare long enough
To quote the side from where
Came the dreams that bled?

When you hear cries of a mate
Can you dare find the words
To solace the broken soul
Devoid of revenge and hate?

दोस्ती

कलम में स्याही कुछ
सहमी सी हैं
जुबान पर लब्ज़ों की 
कमी सी हैं
चंद साँसे भी आज
रुकी सी हैं
ये आदत तो अब 
पुरानी सी हैं
खामोशी से अपनी  
दोस्ती सी हैं

मातम

गैरों को पेश कर
आज खूब रोशनाई
तूने घरौंदे की
क्या इज्जत बढ़ाई
बजाओ तालियाँ कही
मातम न दे सुनाई
कुछ चित्ताएं अंदर
अभी भी हैं जल रहीं

“I defy you to show me discrimination” – India’s External Affairs Minister at Washington DC when asked on minority rights.

लत

आपकी गैरमौजूदगी की आदत हो गई
आपके साएं की तलब भी मिट गई
अब याद न दिलाओ दिन जब गुलज़ार थे
अब कांटो से खेलने की लत लग गई

हिफाजत

जमीन से निकली हैं चीखें
कब तक गूंगे बनें रहोगे?
अतीत को अनदेखा कर
क्या भविष्य बनाओगे?

क्या विधान पढ़ोगे?
क्या कानून लिखोगे?
नए इस दरबार में जाने
किसकी हिफाजत करोगे?

#WrestlersProtests #ParliamentNewBuilding

वफ़ा

खयालों में कुछ नमी सी हैं
नींद भी कुछ खफा सी हैं
दिल में सुकून की कमी सी हैं
आज रात वफ़ा बैचैनी से हैं

बेइख्तियार

कुछ अधूरे नगमो को कैसे
तुम्हारे नाजो अंदाज से भर दूं
तुम्हारे सोहबत में मैं कैसे
मसरूर बन कर रह जाऊ

खोए हुए कदमों को कैसे
अनदेखी राहों पर ले जाऊ
बीतें कुछ लम्हों को कैसे
तुम्हारी आरजूओं से भर दूं

इस वक्त को मैं कैसे
बेइख्तियार कर दूं
जिंदगी की कुछ सुर्खियां कैसे
तुम्हारे साथ फिर से जी लूं