अच्छे भले थे
जब थे फकीर
फिर किस्मत ने बदली
कुछ यूँ लकीर
हर नेमत का अब
यही है क़िस्सा
बलि चढ़ता है
बचे लहू का हिस्सा
Poems by Rohit Malekar
अच्छे भले थे
जब थे फकीर
फिर किस्मत ने बदली
कुछ यूँ लकीर
हर नेमत का अब
यही है क़िस्सा
बलि चढ़ता है
बचे लहू का हिस्सा