निकले थे घर से कभी
दुनिया बदलने हम भी
ना जाने कब हुई पराई
हम से ही हमारी परछाई
आईने में देता है दिखाई
रोज़ नया अजनबी कोई
पूछता रहता है एक पता
है नाम बड़ा जाना-पहचाना
ऐसा नहीं है हरगिज़
कि हार मान चुके हैं हम
तू दिखा दे खुदा तेरा दम
बंदा पी लेगा एक और ग़म
फिर आँसुओं की कहीं
आज बरसात होगी
ज़िंदगी हमको हमारी
औक़ात दिखा देगी