इन निगाहों को इस नकाब से
रिहा ना कीजिएगा
आपके आंसू इस जमाने से
जाहिर ना कीजिएगा
अगर हर आशिक आपका इस गम को
पीने में लग जाएगा
खत्म हो कर शराब हर मयखाने को
फिर ताला लग जाएगा
Poems by Rohit Malekar
इन निगाहों को इस नकाब से
रिहा ना कीजिएगा
आपके आंसू इस जमाने से
जाहिर ना कीजिएगा
अगर हर आशिक आपका इस गम को
पीने में लग जाएगा
खत्म हो कर शराब हर मयखाने को
फिर ताला लग जाएगा