दोस्ती

कलम में स्याही कुछ
सहमी सी हैं
जुबान पर लब्ज़ों की 
कमी सी हैं
चंद साँसे भी आज
रुकी सी हैं
ये आदत तो अब 
पुरानी सी हैं
खामोशी से अपनी  
दोस्ती सी हैं

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