आठवण

अधून मधून पावसात
जाणवते एक कमजोरी
तुझ्या सोबत घेतलेल्या
काही श्र्वासांची शिदोरी
आणि व्यक्त ना केलेल्या
काही भावनांची साठवण
घेऊन कोसळते सर जेव्हा
अश्रुत चिंब तुझी आठवण

वजह

ऐसा नहीं है कि अब
नहीं लगती बारिश सुहानी
कोयल को सुनकर आज भी
गुनगुना लेता हूँ मैं भी धुन वही

ऐसा नहीं है कि अब
सपनों की हैं कोई कमी
अपनी कमियों को आज भी
कामयाबी में बदलने का है यकीन

ऐसा नहीं है कि अब
रुकी हुईं है जिंदगी कही
अगर बंद कर लूं मुठ्ठी आज भी
हौसला है वक्त को काबू कर लूं वही

मगर अफसोस है ये अब
आदत आपकी हमें कुछ ऐसी थी
की जब से हुईं परे दिल से वो मौजूदगी
जाहिल ढूंढता रहता है वजह मुस्कुराने की

दास्तान

मोहब्बत में कुर्बानी की दास्तान
किसी मजनू से मत पूछना
तुम पूछना उस बादल से
जिसने काटी अनगिनत दूरियाँ
सहकर जाने कितनी आँधियाँ
सिर्फ इस एक उम्मीद में
की जब एक दिन मुलाकात होगी
तब कोई बरसात नहीं रुकेगी
वह अपनी मोहब्बत में घुल जाएगा
इस धरती के हर ज़र्रे में बिखरकर
अपना सारा वजूद मिटाकर

The Dandelion Seed

Like a dandelion seed,
that lands on a palm,
I found the muscle,
With the wind to wrestle.

“I am done being swayed,
And pushed and shoved,
I am taking a stand,
to break your command.”

Your palms made a nest,
For a tiny moment’s rest,
For yet another flight,
To take on the wind’s might.

And I heard while I lay,
Your eyes whisper and say,
The words shared by few,
“I see you.”

‘Twas that moment,
That freed all lament,
I knew before I again flew,
I had found me through you.

मौजूदगी

लब्ज़ कही कागज पे
आज उतर ना जाए

जज़्बात कही निगाहों से
जाहिर ना हो जाए

ख्वाइशें कही सीने से
परे ना हो जाए

आपको क्या खबर
आपकी मौजूदगी का असर

मेरी धड़कनों से कही इश्क मेरा
बयान ना हो जाए

भुरळ

धुक्यामध्ये धुकं हरवलं
माझं मन तुझ्यात गुंतलं
आरश्यात कोण उभं
माझं मलाच झालं परकं

खळी तुझ्या गालावर
मग माझी का सावरा सावर?
डोळ्यात तुझ्या काजळ
हृदयात माझ्या का वावटळ?

तुझ्या वेणीतलं फुल
त्याच्याशी ही माझी जळजळ
तुझ्या पायातलं पैंजण
तुझी आणखी एक आठवण

कसा होणार सांभाळ?
कधी होणार तुझ्याशी मेळ?
किती करशील माझा छळ?
उतरेल का कधी तुझी भुरळ?

बरसात

The last stanza is an ode to the original song from the 2001 movie Yaadien

कुछ रोज पहले ऐसी
बरसात हुई थी
मुद्दतो बाद याद तेरी
आई हुई थी

कुछ सांसे सहमी सी
बोझल हुई थी
घडी भी शायद थोड़ी
रुकी हुई थी

जिंदगी एक किताब सी 
बनी हुई थी
जहाँ एक अधूरी कहानी
छिपी हुई थी

तू पहचान जिसमे मेरी
बन ना पाई थी
कुछ खामोश ख्वाइशें भी
वहाँ खोई हुई थी

“कुछ साल पहले दोस्तों
एक बात हुई थी
हमको भी मोहब्बत 
किसी के साथ हुई थी”

तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे

This is an attempted extension to the original song

अपना बना ले पिया
अपना बना ले पिया
सुनी इस डगर पे
हाथ तू थाम ले पिया

अकेली हैं ये रातें हाँ रातें हाँ रातें
बदली हैं जाने कितनी करवटे 
बैचिनी सताए जब तेरी ही बातें 
करते हैं सपने सारे

आसमान में भी नही कोई सितारा तेरे जैसा
तेरी काया को खुदा भी दोहरा ना पाया
मेरी किस्मत पे मैं खुद ही शक करु 

आके मुझे मेरी तनहाई से छुड़ा ले
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे