बेनाम

कुछ मंजिलो के रास्ते नहीं  होते
उन मुसाफ़िरों के काफिले नहीं होते
कुछ जज्बातों के अल्फ़ाज़ नहीं होते
उन खामोशियों में हमसफर नहीं होते

कुछ दुआओं की वजह नहीं होती
उन चाहतो में खुदगर्जी नहीं होती
कुछ ख्वाइशें अंजाम नहीं होती
उन यादों में कड़वाहट नहीं होती

कुछ पल इत्मिनान नहीं होते
उन मौजुदगियों में पराये नहीं होते
कुछ इकरार बयान नहीं होते
उन रिश्तों के नाम नहीं होते

दूरी

तेरे खयालों से खुद को दूर कर सकूं
इतनी अदब मेरे दिल में कहाँ
ये जुर्म तुझसे कबूल कर सकूं
इतनी तू मेरे पास कहाँ

लम्हे

कमबख़्त  वक़्त के फरिश्ते
बेईमानी पे उतर आते हैं
पलक झपकते ही
कुछ साल गुज़र जाते हैं
कुछ रिश्तों के रंग
कुछ अपने खो जाते हैं

कमबख़्त वक़्त के फरिश्ते
बेईमानी पे उतर आते हैं
पलक झपकते ही
कुछ साल याद आते हैं
कुछ मौजुदगिया तो दरकार हैं
कुछ लम्हे कह जाते हैं

कहानी

ये तो खेल हैं बस सियासतगरों का
नहीं जोधा या पद्मावती की कहानी
जो दिखा रहे हैं सीना तान के दिलेरी
उनकी तो आदत हैं तख़्त की दलाली

चलो मान भी लो हैं सारे इलज़ाम सही
जिनपे हैं ऊँगली उठी वह हैं मुजरिम भी
मगर धमका के एक नारी को रखी लाज हमारी
क्या ये गर्व से कहेगी हमारी रानी?

India has had a complex history with multiple versions of the same events. Any intentional efforts to malign respected figures who sacrificed in the making of our nation should be discouraged – I support that. But no one has to live in the fear of their life if ever there is such an act in question. #Padmavati