मजदूर

पूंछती हैं राहें तुझे ए हमसफर
तेरी मंज़िल कब होगी करीब

जब तूफान को हराकर
चिड़िया को होगी तबस्सुम नसीब
तब सुला देंगे ये बेख्वाब रात
कह गया कोई एक गरीब

पूंछती हैं राहें तुझे ए हमसफर
कब तक लड़ेगा तू बिना सहारे

भूख को कर दफ़न अरसा हो गया
मातम में हम अकेले ही रो लिए
छोड़ रंजिश अभी उम्मीद कायम हैं
इस बरसात ने आँसू जो पोंछ दिए

Tens of thousands of impoverished migrant workers have been forced to leave cities and towns where they had toiled for years building homes and roads after they were abandoned by their employers — casualties of a nationwide lockdown in India to stop the virus from spreading.

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